परियों का किसान
एक समय की बात है, एक छोटे-से गांव में एक समृद्ध किसान रहता था। उसके पास विशाल, हरे-भरे खेत थे और उसने अपने पास काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों को रखा था जो उसके खेतों में मेहनत करते थे। यह किसान अपनी निष्ठा और मेहनत के लिए जाना जाता था। वह अपनी फसलों को पूरी तरह से पोषण देता था, समय पर सिंचाई और जैविक खाद इत्यादि सुनिश्चित करता था। यदि किसी बीमारी ने उसकी फसलों को प्रभावित किया तो वह उसे उचित उपचार देता था। लोग उसके खेतों से उत्पन्न अनाजों की खरीद करने का इंतजार करते थे, क्योंकि वे उच्च गुणवत्ता के थे।
अपनी ईमानदारी और मेहनत से, किसान सम्पन्न बन गया और समृद्ध हुआ। उसके पास एक दयालु हृदय था और वह हमेशा गांव के लोगों की मदद के लिए तत्पर रहता था। वह कभी भी उनका अपमान नहीं करता था और सबको दुखी नहीं करने की कोशिश करता था।
एक दिन,हर रोज़ की तरह, किसान अपने खेतों की देखभाल कर रहा था। सब कुछ अद्वितीय रूप से चल रहा था। बारिश उत्साहजनक रही थी और उसके खेत फलने लगे, जो एक उपहारमय फसल की ओर इशारा कर रहे थे। किसान बहुत प्रसन्न था।
एक रात किसान अपने खेत से घर लौटl, अगले सुबह, जब वह अपने खेतों में वापस गया, उसका मन उदास हो गया जब उसने देखा कि सभी अनाजों की कटाई रात में हो गई थी। किसान बहुत दुखी हुआ और समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।
एक पवित्र मन के साथ, उसने प्रार्थना की, यह मानकर कि यह भगवान की इच्छा है, और फिर से कृषि का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। किसान, अपने सौ मजदूरों के साथ, अपार मेहनत करके खेती करने लगा। धीरे-धीरे, फसलें फलने लगीं और एक बार फिर खेत सुंदर अनाज से सज गए। किसान की खुशी फिर से वापस आ गई।
लेकिन फिर, एक सुबह उठते ही, उसने फसलों की गायबी को देखा। किसान मन ही मन टूट गया और उसने ईश्वर से प्रार्थना की हे प्रभु अगर ऐसे ही मेरे अनाज गायब होते रहे तो मैं अपने और अपने 100 मजदूरों के परिवार का पालन पोषण कैसे कर पाऊंगा परंतु किसान इसे ईश्वर की इच्छा मानकर पुनः खेती करने को तैयार हो गया, हालांकि, उसने अधिक सतर्कता से काम किया। वह रात में अपने खेतों की रक्षा करने लगा। एक रात, उसने देखा कि आसमान से एक चमकदार सफेद प्रकाश नीचे आ रहा है, जैसे तारे आकाश से उतर रहे हों। आश्चर्य से भरी हुई, वह सतर्कता से अपने खेतों के पास गया। उसकी आश्चर्य भरी नज़र को देखकर, उसने देखा कि मनुष्य की तरह रूपधारी प्राणी जिनके पंख थे अनाज को काट रहे हैं और उन्हें जादुई बक्सों में भर रहे हैं। यद्यपि वे बक्से आकार में छोटे थे, लेकिन इन बक्सों को कभी-कभी पूरी तरह से भरना संभव नहीं था, चाहे उनमें अनाज कितना ही भर दिया जाए। धीमी कदमों से, किसान ने उनमें से एक प्राणी को पकड़ा लिया ऐसा करते ही अन्य मानव आकृतियां आकाश की तरफ उड़ गई और गायब हो गई। उस किसान में नम्रता पूर्वक उस मानव आकृति से पूछा कि आप कौन हैं और मेरे खेतों से रात को अनाज क्यों चोरी कर रहे हैं। ऐसा सुनते हैं वह मानव आकृति हंस पड़ा और बोला हे किसान मैं परीलोक का सैनिक हूं और परियों की रानी सोनपरी की आज्ञा से तुम्हारे खेतों के अनाज को खरीद रहा हूं। यह सुनकर किसान ने कहा कि आप मेरे खेतों से रात को अनाज चुपचाप ले जा रहे हैं इसका मूल्य भी मुझे नहीं मिल रहा है तो यह तो चोरी हुई इस पर वह परीलोक का सैनिक फिर मुस्कुराया और उसने किसान को कहा तुम मेरे साथ अपने घर चलो और अपने अनाज वाले कमरे में पुणे में दो घरों को देखो ऐसा कहकर परीलोक का चले किसान को उड़ा कर उसके घर के आंगन में ले जाता है रात गहरी थी उसके घर में सब लोग सोए हुए थे वह चुपचाप अनाज वाले कमरे में जाता है उसे दो घड़े वहां पर मिलते हैं उनके ढक्कन को हटाने पर किसान की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहता दोनों खड़े अलौकिक सोने की मोहरों से भरे पड़े थे
परी लोग का सैनिक बोला तुम सब कुछ जानते हो। तुम महान अनाज उत्पन्न करते हो क्योंकि तुम मेहनत, भक्ति और प्यार से खेती करते हो। सोनपरी खुद तुम्हारे अनाज को भोग के रूप में लेती है। वह सदैव अपने स्वर्णिम सिक्के तुम्हारे अनाज के बदले में देती रहेगी। इसे हमारा राज़ रखो।" इन शब्दों के साथ, सैनिक ने किसान को एक शानदार, मणि से भरा बक्सा भेंट किया और उसे सलाह दी कि वह किसी को भी इनके संबंध के बारे में कभी न बताए।
उस दिन से किसान को अपनी फसलें कभी भी बाजार में बेचने की ज़रूरत नहीं पड़ी। वह निष्ठापूर्वक खेती करता और हर बार उसके फसल रात घने अंधेरे में परीलोक के सपने अपने साथ ले जाते हैं और कुछ अनाज उसके लिए छोड़ जाते, सोनपरी की स्वर्णिम सिक्कों के साथ। किसान के खेत में उन्नति हुई और उसने समृद्धि भरा जीवन जिया।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की अपने काम को पूरी मेहनत लगन और ईमानदारी से करना चाहिए।
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